Himachal Panchayat Election: निर्विरोध जीत पर अब बरसेंगे करोड़ों! प्रधान चुनने पर 25 लाख, BDC पर 50 लाख मिलेगा; जिला परिषद पर 1 करोड़ नगद

Himachal Panchayat Election: हिमाचल प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने बड़ा दांव खेला है। पंचायती राज विभाग ने निर्विरोध चुने जाने वाले प्रतिनिधियों के लिए प्रोत्साहन राशि में भारी बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी कर दी है। अब निर्विरोध पंचायत को 25 लाख और जिला परिषद सदस्य को 1 करोड़ रुपये तक का इनाम मिलेगा। सरकार का मकसद चुनाव में होने वाली गुटबाजी को रोककर आपसी सहमति को बढ़ावा देना है।
Himachal Panchayat Election: Govt Hikes Incentive for Unopposed Candidates up to 900 Percent; Rs 1 Crore for Zila Parishad
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Himachal Panchayat Election:  हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ग्रामीण राजनीति में शुचिता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, अब निर्विरोध चुने जाने वाले जन प्रतिनिधियों और पंचायतों के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में 150 से लेकर 900 फीसदी तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस कदम को चुनाव के दौरान होने वाले भारी खर्च और ग्रामीण गुटबाजी को कम करने की दिशा में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

ग्राम पंचायतों के लिए 25 लाख का फंड, लेकिन रख दी यह कड़ी शर्त

सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर 'सर्वसम्मति' को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया है। हालांकि, यह राशि प्राप्त करना इतना आसान नहीं होगा। विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, 25 लाख रुपये का यह नकद इनाम तभी मिलेगा जब न केवल पंचायत प्रधान, बल्कि उप-प्रधान और सभी वार्ड सदस्य भी निर्विरोध चुने जाएं। यानी पूरी की पूरी पंचायत को बिना वोटिंग के आपसी सहमति से चुनना होगा। इस राशि का उपयोग पंचायत के विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

BDC सदस्यों के लिए 900% का इजाफा, इनाम राशि पहुंची 50 लाख के पार

सबसे चौंकाने वाली और बड़ी बढ़ोतरी पंचायत समिति यानी बीडीसी (BDC) सदस्यों के लिए की गई है। पहले जहां किसी बीडीसी सदस्य के निर्विरोध चुने जाने पर मात्र 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती थी, उसे अब बढ़ाकर सीधा 50 लाख रुपये कर दिया गया है। यह 900 फीसदी की विशाल बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि एक बीडीसी वार्ड के अंतर्गत दो से चार पंचायतें आती हैं, इसलिए वहां आपसी सहमति बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने इतनी बड़ी राशि का प्रावधान किया है ताकि गांवों में खींचतान के बजाय विकास को प्राथमिकता मिले।

जिला परिषद के निर्विरोध निर्वाचन पर 1 करोड़ का 'बोनस'

हिमाचल सरकार ने जिला परिषद के स्तर पर भी इनाम राशि को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई जिला परिषद सदस्य निर्विरोध चुना जाता है, तो उसे मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर अब सीधे 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें लगभग 567 फीसदी का इजाफा हुआ है। जिला परिषद सदस्य के क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा होता है, ऐसे में वहां निर्विरोध चयन होना लोकतंत्र की एक बड़ी जीत मानी जाएगी। सरकार का मानना है कि जो पैसा चुनाव प्रचार और मशीनरी पर खर्च होता है, वह पैसा सीधे क्षेत्र के विकास में लगे, यही इस योजना का मूल लक्ष्य है।

3758 पंचायतों में चुनावी बिगुल जल्द, आचार संहिता की तैयारी

राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के सूत्रों की मानें तो हिमाचल की 3758 पंचायतों में चुनावी बिगुल अगले एक सप्ताह के भीतर फूंका जा सकता है। नियमानुसार, 31 मई से पहले प्रदेश की सभी पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया पूरी की जानी है। शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अपने नए प्रतिनिधियों को चुनने के लिए तैयार हैं। सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि में की गई इस बढ़ोतरी ने उम्मीदवारों और ग्रामीणों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि कितने गांवों में लोकतंत्र 'वोट की चोट' के बजाय 'सहमति के स्वर' से जीतता है।

अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश, विकास कार्यों पर रहेगा जोर

पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोत्साहन राशि सीधे पंचायतों के विकास फंड में जाएगी, जिससे गांव की सड़कों, पानी की व्यवस्था और सामुदायिक भवनों का कायाकल्प किया जा सकेगा। चुनाव आयोग और प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों (DC) को निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता बनाए रखें। निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची पहले ही कह चुके हैं कि पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। ऐसे में निर्विरोध चुनाव न केवल प्रशासनिक बोझ कम करेंगे, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले चुनावी खर्च के बोझ को भी हल्का करेंगे।