पेट्रोल के दाम में आएगी भारी गिरावट? नितिन गडकरी ने दिए 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग के संकेत
नई दिल्ली: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक ऐसी संभावना जताई है, जिससे देश के मध्यम वर्ग के चेहरे खिल सकते हैं। गडकरी ने संकेत दिया है कि भविष्य में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। यदि भारत इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तो वर्तमान में ₹100 के आसपास मिल रहा पेट्रोल ₹60 से ₹70 के स्तर पर आ सकता है। यह घोषणा उस समय आई है जब दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है।
क्या है एथेनॉल ब्लेंडिंग और कैसे काम करेगा यह फॉर्मूला?
पेट्रोल या डीजल जैसे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों में एथेनॉल को एक निश्चित अनुपात में मिलाने की प्रक्रिया को एथेनॉल ब्लेंडिंग कहा जाता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे, मक्का, सड़े-गले आलू और खराब हो चुके चावल या गेहूं से तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि यह एक रिन्यूएबल फ्यूल (Renewable Fuel) है। नितिन गडकरी का मानना है कि चूंकि एथेनॉल का उत्पादन भारत के भीतर कृषि उत्पादों से होगा, इसलिए इसकी लागत पेट्रोल की तुलना में काफी कम होगी, जिससे अंतिम उपभोक्ता को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
अर्थव्यवस्था और आयात बोझ पर पड़ेगा सकारात्मक असर
नितिन गडकरी ने महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि भारत अपनी तेल संबंधी जरूरतों का लगभग 87% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हर साल देश लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात कर रहा है, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखने के पीछे सरकार की मंशा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' बनाना है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश का पैसा देश के किसानों और घरेलू उद्योगों के काम आएगा।
फ्लेक्स-फ्यूल इंजन: तकनीक में बदलाव की तैयारी
100% एथेनॉल मिश्रण (E100) का उपयोग करने के लिए सामान्य पेट्रोल इंजनों के बजाय 'स्पेशल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल' (FFV) की आवश्यकता होती है। फ्लेक्स-फ्यूल इंजन गैसोलीन के एक स्वच्छ और हाई-ऑक्टेन विकल्प के रूप में काम करते हैं। गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों से भी अपील की है कि वे अब लागत के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान दें ताकि नए बाजारों में भारत की पकड़ मजबूत हो सके। सरकार का उद्देश्य उत्सर्जन को कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। वर्तमान में भारत में E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) पर काम चल रहा है, लेकिन भविष्य का लक्ष्य E100 है।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन: गेम चेंजर साबित होगा बायोफ्यूल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए 'गेम चेंजर' बताया है। पीएम मोदी के अनुसार, 20% एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत से ही देश ने साढ़े चार करोड़ बैरल कच्चे तेल का आयात बचाया है, जिससे लगभग डेढ़ लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि वहां 100% एथेनॉल मिश्रण पहले से ही सफल है। भारत में भी इसे लागू करने से प्रदूषण मुक्त वातावरण और सस्ता परिवहन संभव हो पाएगा, जो विकसित भारत की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
किसानों के लिए मुनाफे का नया द्वार
चूंकि एथेनॉल का निर्माण कृषि आधारित उत्पादों से होता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने का सीधा फायदा गन्ना, मक्का और चावल उगाने वाले किसानों को होगा। सड़े-गले अनाज और कृषि अपशिष्ट (Crop Waste) का सही दाम मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे न केवल खेती मुनाफे का सौदा बनेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नई एथेनॉल फैक्ट्रियां लगने से रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग न केवल उपभोक्ताओं की जेब को राहत देगी, बल्कि पर्यावरण और किसान दोनों के लिए एक सुखद भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी।