HP Municipal Election 2026: हिमाचल के 51 शहरी निकायों में चुनावी बिगुल बजा, 17 मई को मतदान; आचार संहिता लागू
HP Municipal Election 2026: हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र के छोटे उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के 51 नगर निकायों के लिए चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इस घोषणा के तहत प्रदेश के 4 प्रमुख नगर निगमों (मंडी, सोलन, धर्मशाला और पालमपुर) के साथ-साथ 25 नगर परिषदों और 22 नगर पंचायतों में आगामी 17 मई को मतदान संपन्न कराया जाएगा। चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही संबंधित शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
मतदान और नतीजों का गणित: क्यों अलग हैं तारीखें?
निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी इंतजाम पुख्ता कर लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत और नगर परिषदों में मतदान वाले दिन यानी 17 मई की शाम को ही नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। हालांकि, चारों नगर निगमों के नतीजों के लिए प्रदेश को 31 मई तक का इंतजार करना होगा। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े जाते हैं, जिसका सीधा प्रभाव आगामी जिला परिषद चुनावों पर पड़ सकता है। इसी राजनीतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
पहली बार वोट डालने वालों में भारी उत्साह
इस बार के निकाय चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन चुनावों में कुल 3,60,859 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1,80,963 पुरुष और 1,79,882 महिला मतदाता शामिल हैं, जबकि 14 अन्य मतदाता भी सूची में दर्ज हैं। विशेष बात यह है कि इस बार 1,808 ऐसे युवा मतदाता हैं जो पहली बार (First Time Voters) लोकतंत्र के इस उत्सव का हिस्सा बनेंगे। इन युवाओं की भागीदारी शहरी विकास की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
नामांकन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
चुनाव के लिए विधिवत अधिसूचना आज यानी 21 अप्रैल को जारी कर दी गई है। उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र 29 अप्रैल, 30 अप्रैल और 2 मई को दोपहर 3 बजे तक संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के पास जमा कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की छंटनी या जांच का कार्य 4 मई को सुबह 10 बजे से शुरू होगा। जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 6 मई को दोपहर 3 बजे तक ऐसा कर सकते हैं। नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होते ही चुनाव मैदान में डटे उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए जाएंगे।
चुनावी खर्च की सीमा और वोटिंग का तरीका
राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा भी निर्धारित की है। नगर निगम में पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे। वहीं, नगर परिषद के लिए यह सीमा 75 हजार रुपये और नगर पंचायत के लिए 50 हजार रुपये तय की गई है। सभी उम्मीदवारों को मतदान के एक महीने के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा आयोग को देना अनिवार्य होगा। उल्लेखनीय है कि शहरी निकायों के चुनाव ईवीएम (EVM) के माध्यम से कराए जाएंगे, जबकि आगामी पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होंगे।
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जिलों के डीसी (DC), एसडीएम (SDM) और बीडीओ (BDO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना अनुमति के मुख्यालय न छोड़ें। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी अधिकारी को विशेष परिस्थितियों के अलावा छुट्टी नहीं दी जाएगी। अनिल खाची ने यह भी संकेत दिए कि राज्य की 3857 पंचायतों में होने वाले चुनावों की घोषणा भी अगले एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी, जिससे प्रदेश में चुनावी सरगर्मी और बढ़ने वाली है।