Himachal News || मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए बेटी के साथ 70 किमी बेटी के साथ पैदल चले डिप्टी CM

Himachal News || बेटी मां चिंतपूर्णी की 3 दिन की कठिन पैदल यात्रा पर निकली तो मुकेश अग्निहोत्री पिता के साथ-साथ मां का किरदार भी निभाते नजर आए
Himachal News || मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए बेटी के साथ 70 किमी बेटी के साथ पैदल चले डिप्टी CM
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Himachal News || मां चिंतपूर्णी की 3 दिन की कठिन यात्रा पर निकली बेटी के साथ मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh agnihotri) पिता के साथ-साथ मां की भी भूमिका निभाते नजर आए।तेज़ धूप, बारिश (rain) , तूफ़ान और व्यथित मन के बीच लगातार कदम बढ़ते जा रहे थे। बेटी को लोगों का भी प्यारा स्नेह मिला। बेटी के पैरों में छाले पड़ गए तो पिता मुकेश अग्निहोत्री ने ऐसे मरहम लगाया जैसे वह भी मां होने का फर्ज निभा रहे हों। कभी अग्निहोत्री बेटी आस्था को दिलासा देते नजर आए।  कभी थकान मिटाने के लिए, कभी पैरों पर पड़े छालों पर मरहम लगाते और हिम्मत (courage) बढ़ाने के लिए सीने से लगाते नज़र आए। कभी बेटी के सिर को  दबाकर दर्द  (pain) को भी कम  करते नज़र आए।मुकेश अग्निहोत्री को पिता के रूप में दोहरी भूमिका निभानी पड़ी। कई पल मार्मिक भी आये जब बाप-बेटी भी भावुक हो गये।

आस्था ने माँ की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की

स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की अधूरी इच्छा उनकी बेटी ने पूरी की। आस्था अग्निहोत्री ने माता चिंतपूर्णी मंदिर की अपनी पदयात्रा का संकल्प पूरा किया। 70 किमी की यह पदयात्रा तीसरे दिन रविवार (sunday) को माता चिंतापूर्णी मंदिर में दर्शन और प्रार्थना के साथ हुई। पदयात्रा आस्था कुंज गौंदपुर जयचंद (हरोली) से शुरू हुई और गौंदपुर बुला, भडियार, दुलैहड़, हीरा नगर, हीरा, हलेडा, पुबोवाल, ठाकरान, पलकवाह, भदौरी, हरोली, समनाल, रोरा, संसोवाल, धर्मपुर, कांगड़, बढेरा से होकर गुजरी। पहले दिन सलोह, घालूवाल, भदसाली, ईसपुर और पंडोगा! आस्था ने अपनी मां स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की आत्मिक शांति और उनके पिता मुकेश अग्निहोत्री के लिए माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद की प्रार्थना। सभी ने सिम्मी अग्निहोत्री के त्याग, समर्पण और उनके निःस्वार्थ सेवा भाव का स्मरण कर उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया।

सभी के लिए हिम्मत और सतत प्रेरणा का सबब बनी पदयात्रा

 सभी के प्रेरणा (motivation ) बनी यह यात्रा और सतत प्रेरणा का सबब बनी यात्रा प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के नि:स्वार्थ त्याग और जीवन पर्यंत के सम्मान में निर्विकार यह आस्थामयी पदयात्रा सभी के लिए प्रेरणा (motivation) और सतत प्रेरणा का सबब बनी है।वहां रात्रि स्थिरता के बाद शनिवार को भदसाली, ईसपुर, पंडोगा, खड्ड, पंजावर, नागनौली, गुगलैहड़, बड़ेड़ा राजपूतां, जाडला, लोहारली, चुरूडू और अंब से होते हुए मुबारिकपुर में रुकी और तीसरे दिन घे दा घट्टा, सिद्ध लेहड़, कि उद्यम और भरवाईं होते हुए श्री चिंतापूर्णी जी में शाही हुई।रैली में कई राजनीतिक नेताओं, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

मां को मोक्ष मिले माता रानी से यही प्रार्थना: डॉ आस्था

जनता ने जिस बेटी को प्यार और आशीर्वाद (blessings) दिया है, हम उसके लिए जीवन भर कर्जदार रहेंगे।माँ को मोक्ष मिले माता रानी से यही प्रार्थना है। आस्था अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी मां प्रो. सिम्मी की माता चिंतपूर्णी पर अगाध श्रद्धा थी। हमने माता रानी के दरबार में माता से अपनी मां के लिए मोक्ष की प्रार्थना (prayer) की है।माता रानी के जगराते से उनकी सभी इच्छा श्री चिंतापूर्णी जी का आशीर्वाद लेने की थी लेकिन उनकी इच्छा अधूरी रह गई।इस पूरी पदयात्रा में मेरी मां और माता रानी ही मेरा, मेरे पिता और साथ चलने वाले हर सहयोगी का बल और प्रेरणा थी। सभी के आशीर्वाद से हमने यह यात्रा पूर्ण की।

 बेटी के जज्बे को सलाम: अग्निहोत्री

 इस पूरी पदयात्रा में वह जिस बेटी के जज्बे को सलाम करते हैं, वह उनकी बेटी के जज्बे को सलाम करते हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री (deputy  chief minister Mukesh agnihotri)ने कहा कि प्रोफेसर सिम्मी के लिए लिया गया संकल्प बेटी आस्था ने पूरा किया।