Himachal Wildlife Raid: हिमाचल मेंं तेंदुए के 85 नाखून और दांत बरामद, ज्वेलरी शॉप में क्यों रखे थे अंग? वन विभाग ने चलाया ऑपरेशन
Himachal Wildlife Raid: शिमला जिले के रोहड़ू में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब वन विभाग की टीम ने अचानक सर्राफा बाजार की घेराबंदी कर दी। विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर की कुछ नामी ज्वेलरी दुकानों में प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंग बेचे जा रहे हैं। बिना देर किए विभाग ने एक विशेष रणनीति तैयार की और बाजार की छह दुकानों पर एक साथ छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान दुकानदार संभल भी नहीं पाए और उनके पास से तेंदुए के 86 नाखून, 5 नुकीले दांत और दुर्लभ पक्षियों के रंगीन पंख बरामद किए गए। बरामद सामग्री को देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
46 अधिकारियों की फौज और बड़ी बरामदगी
इस महा-छापेमारी को अंजाम देने के लिए वन विभाग ने किसी भी तरह की ढील नहीं छोड़ी थी। डीएफओ के नेतृत्व में कुल 46 अधिकारियों और कर्मचारियों की अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं। छापेमारी के दौरान कुल मिलाकर लगभग 100 वन्यजीवों के अंग जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से करीब 10 अंगों की प्रजाति का पता अभी तक नहीं लग पाया है, जिसकी जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। विभाग की इस "सर्जिकल स्ट्राइक" ने वन्यजीव तस्करी के उस स्थानीय नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है जो लंबे समय से चोरी-छिपे फल-फूल रहा था।अंधविश्वास का खेल और ज्वेलर्स की चालाकी
जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये ज्वेलर्स आखिर क्यों इन प्रतिबंधित चीजों को अपनी दुकानों में रखते थे। जानकारी के मुताबिक, कुछ शातिर दुकानदार तेंदुए के नाखूनों और दांतों का उपयोग ताबीज और सोने-चांदी के लॉकेट बनाने में कर रहे थे। बाजार में वन्यजीवों के अंग से बने इन आभूषणों को अंधविश्वास के नाम पर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। लोगों को यह कहकर गुमराह किया जाता था कि तेंदुए का नाखून पास रखने से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उत्पादों को बेचना और खरीदना, दोनों ही कानूनन जुर्म हैं।कानूनी कार्रवाई और डीएफओ की चेतावनी
डीएफओ रवि शंकर शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया कि तेंदुआ एक संरक्षित वन्यजीव है और इसके किसी भी हिस्से का व्यापार करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने बताया कि जिन दुकानों से ये वन्यजीवों के अंग बरामद हुए हैं, उनके मालिकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन अंगों की सप्लाई चेन कहाँ से जुड़ी है और क्या इसके पीछे शिकारियों का कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय गिरोह तो नहीं है।जनता से अपील और आगामी रणनीति
वन विभाग की इस कार्रवाई से न केवल तस्करों में खौफ पैदा हुआ है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक सबक है। विभाग ने जनता से पुरजोर अपील की है कि वे अंधविश्वास में आकर वन्यजीवों के अंग से बनी किसी भी चीज का उपयोग न करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और भी तेज होगा। रोहड़ू के बाद अब जिले के अन्य बाजारों में भी ज्वेलरी और सजावटी सामान की दुकानों पर नजर रखी जाएगी। विभाग का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकना और इस जहरीले कारोबार को जड़ से मिटाना है।
Web Title: rohru wildlife raid leopard nails seized shimla jewelry shops
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pangi ghati dainik patrika
Published On: Apr 05, 2026 | 06:49 AM