Pashu Mitra Himachal: 10वीं में 77% नंबर वाली बेटी 5 हजार सैलरी के लिए 25KG बोरी उठाने को मजबूर

Pashu Mitra Himachal: 10वीं में 77% नंबर वाली बेटी 5 हजार सैलरी के लिए 25KG बोरी उठाने को मजबूर
Pashu Mitra Himachal: 10वीं में 77% नंबर वाली बेटी 5 हजार सैलरी के लिए 25KG बोरी उठाने को मजबूर
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Pashu Mitra Himachal: ​शिमला।  हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर से सामने आई एक तस्वीर ने आज हर किसी के दिल को झकझोर कर दिया है। धर्मपुर महाविद्यालय के खेल मैदान में पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। एक नौकरी पाने की चाहत में कतार में खड़ी बेटियों की आंखों में सपने थे, लेकिन कंधों पर भारी जिम्मेदारी का बोझ। इसी बीच 25 किलो वजन की बोरी उठाकर दौड़ रही एक बेटी अचानक संतुलन खो बैठी और सीधे मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी। मैदान में सन्नाटा पसर गया, लेकिन जो अगले ही पल हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि पहाड़ की बेटियां हारना नहीं जानतीं।

गिरकर फिर संभली हिमाचल की बेटी

गिरने के बाद उस बेटी ने दर्द से संभालकर फिर से बोरी उठाई और फिर भागना शुरू किया। वीडियों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह नजारा सिर्फ एक शारीरिक परीक्षा नहीं थी, बल्कि अपनी किस्मत बदलने के लिए एक नौकरी की खातिर लड़ी जा रही जंग थी। अधिकारियों के दस्तावेजों के अनुसार इस बेटी ने दसवीं कक्षा में 77 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। पढ़ाई में इतनी अव्वल होने के बावजूद घर के कठिन हलात ने आज उसे यहां खड़ा कर दिय हुआ है। अधिकारी भी उस वक्त दंग रह गए जब उन्होंने देखा कि इतने अच्छे नंबर लाने वाली छात्रा महज एक अस्थायी पद के लिए इतनी मशक्कत कर रही है। पशु मित्र भर्ती के दौरान 25 किलो बोरी के साथ गिरी महिला। - Dainik Bhaskar

क्या है पशु मित्र भर्ती और चयन की कठिन चुनौती?

पशुपालन विभाग की इस नौकरी के लिए नियम काफी सख्त रखे गए हैं। अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन उठाकर महज एक मिनट के भीतर 100 मीटर की दूरी तय करनी होती है। धर्मपुर में आयोजित इस प्रक्रिया में कुल 147 आवेदकों में से 130 ने भाग लिया। हर कोई 5000 रुपये के मासिक मानदेय वाली इस नौकरी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा था। जिस बेटी की चर्चा पूरे मैदान में रही, उसकी जिद और संकल्प ने वहाँ मौजूद अधिकारियों को भी तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। बेटियों की यह आत्मनिर्भर बनने की चाहत सिस्टम के लिए भी एक बड़ा संदेश है।

बेरोजगारी का दर्द या सियासत की नई बिसात?

भले ही यह नौकरी अस्थायी है और इसमें दिन में केवल चार घंटे ही काम करना है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह सहारा बनने की पहली सीढ़ी है। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. घनश्याम भूपल ने बताया कि चयन पूरी तरह से मेरिट और नियमों के आधार पर होगा। हालांकि, इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष में रहते हुए जो सवाल कांग्रेस ने पिछली सरकार की भर्तियों पर उठाए थे, अब वही सवाल जनता वर्तमान सरकार की कठिन भर्ती प्रक्रियाओं पर उठा रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक मेधावी बेटी को नौकरी के लिए इस तरह गिरना पड़ेगा?

पारदर्शिता के साथ तैयार होगी फाइनल मेरिट लिस्ट

पशुपालन विभाग की ओर से इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष उपसमिति बनाई गई है। यह कमेटी अभ्यर्थियों के फिजिकल टेस्ट और उनके शैक्षणिक अंकों का गहन मूल्यांकन करेगी। इसके बाद एक फाइनल मेरिट सूची तैयार कर 14 मार्च तक उपनिदेशक, पशुपालन विभाग मंडी को भेजी जाएगी। भले ही परिणाम कुछ भी रहे, लेकिन धर्मपुर के मैदान पर गिरी और फिर खड़ी हुई उस बेटी ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी नौकरी और अपने परिवार के सम्मान के लिए किसी भी बाधा को पार करने की हिम्मत रखती है।