PM Awas Yojana: सरकार की बड़ी सौगात, अब 35 जनजातियों को मिलेगा अपना घर; मुख्यमंत्री आवास योजना का बढ़ा दायरा

PM Awas Yojana: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का दायरा बढ़ाते हुए प्रदेश की 35 जनजातियों को बड़ी सौगात दी है। अब इन जातियों के पात्र लाभार्थियों को 'सैचुरेशन मोड' पर घर उपलब्ध कराए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि सरकार हर वंचित तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
Pm Awas Yojana 35
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PM Awas Yojana: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के गरीब और वंचित वर्गों के लिए 'अपना घर' के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर अक्सर लोगों के मन में उत्साह रहता है क्योंकि यह सीधे तौर पर गरीब परिवारों की छत से जुड़ी योजना है। अब यूपी सरकार ने इस योजना का दायरा और अधिक व्यापक कर दिया है। सरकार के नए फैसले के अनुसार, प्रदेश की कुल 35 जनजातियों को इस योजना के दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे हजारों परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

इन 35 जातियों को मिलेगा योजना का सीधा लाभ: यहाँ देखें पूरी सूची

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। साल 2018 में शुरू हुई इस योजना के शुरुआती चरण में केवल वनटांगिया और मुसहर जातियों को ही शामिल किया गया था। लेकिन समय के साथ इसमें कोल, थारू, सहरिया, नट, चेरो, बैगा, बोक्सा, बंजारा और सपेरा जैसी 18 जातियों को जोड़ा गया। अब इस सूची का विस्तार करते हुए भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड और उसकी पर्याय जातियों जैसे धुरिया, ओझा, नायक, पठारी, राजगोंड, खरवार, खैरवार, परहिया, पंखा, पनिका, अगरिया, पठारी, भुइया और भूनिया जातियों को भी पात्रता श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।

'सैचुरेशन मोड' पर काम करेगी सरकार, 2 साल का रखा गया लक्ष्य

मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सरकार का दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट है। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने बताया कि यह योजना 'सैचुरेशन मोड' पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि योजना में शामिल किसी भी जाति के सभी पात्र लाभार्थियों को शुरुआत के पहले दो साल के भीतर ही शत-प्रतिशत कवर करने का प्रयास किया जाता है। मुसहर और वनटांगिया जातियों के लगभग सभी पात्र लाभार्थियों को अब तक आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अब नई शामिल की गई जातियों के लिए भी जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द पात्रता सूची तैयार करें ताकि आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

पिछली सरकारों पर प्रहार: वोट बैंक के बजाय सम्मान की राजनीति

सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी छिपा है। केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने पिछड़ी और वंचित जातियों को केवल एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल किया था, लेकिन उनकी मूलभूत जरूरतों जैसे घर और सामाजिक सम्मान की कभी चिंता नहीं की। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर यूपी की 'डबल इंजन' सरकार इन जातियों को उनका हक और छत देकर उनका मान बढ़ा रही है। यह योजना अब इन परिवारों के लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का एक बड़ा आधार बन गई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से प्रेरणा और किस्तों में भुगतान की व्यवस्था

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) की तर्ज पर ही डिजाइन किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से प्रेरणा लेकर शुरू की गई इस योजना में भी लाभार्थियों को घर बनाने के लिए पैसा सीधे उनके बैंक खाते में किस्तों में दिया जाता है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाती है और लाभार्थी अपनी देखरेख में मजबूत घर का निर्माण कर पाते हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण बेघर हुए परिवारों, कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को भी इस योजना में प्राथमिकता दी जा रही है।

सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई बयार

योगी सरकार के इस फैसले से न केवल इन 35 जातियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। पक्के घर मिलने से गरीब परिवारों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, जिससे वे अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं। सरकार की इस 'बंपर सौगात' के बाद अब प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में खुशी की लहर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी मुस्तैदी से इन पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें उनके सपनों का घर मुहैया कराता है। यह कदम निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।